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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

इस्लामी चरमपंथ को रोकने हेतु फ्रांसीसी विधेयक

G.S. Paper-II

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में फ्रांस की कैबिनेट ने फ्रांस में बढ़ रहे इस्लामी चरमपंथ के विरुद्ध एक विधेयक प्रस्तुत किया है जो जनवरी में यहां की नेशनल असेंबली में प्रस्तुत की जाएगी।
  • उल्लेखनीय है कि फ्रांसिसी कैबिनेट के द्वारा प्रस्तुत मूल विधेयक का नाम “अलगाववाद विरोधी विधेयक” (Anti-Separatism Bill) रखा गया था लेकिन उदारवादियों समेत अन्य दलों के द्वारा इस शीर्षक की आलोचना उपरांत इसका नाम बदलकर गणतन्त्र के मूल्यों को मजबूत करने के लिए मसौदा कानून” (draft law to strengthen republican values) कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि-

  • पिछले कुछ वर्षों से फ्रांस पर हुए लगातार हमलों के कारण यह विधेयक काफी समय से प्रस्तावित था। उल्लेखनीय है कि फ्रांस में चार्ली हेब्दो के ऑफिस पर हुए आतंकवादी हमले के उपरांत फ्रांस में लगातार कई आतंकवादी हमले हो चुके हैं।
  • इस विधेयक को लाने की तात्कालिक पृष्ठभूमि में एक छात्र के द्वारा अध्यापक सैमुअल पैटी की हत्या किया जाना था जिसने पूरे फ्रांस को आंदोलित कर दिया। उल्लेखनीय है कि इस घटना को लेकर फ्रांसीसी समुदाय के द्वारा यह चिंता जाहिर की गई कि ऐसी घटनाएं पूरे मुस्लिम समुदाय को कलंकित कर सकता है। गौरतलब है कि पूरे यूरोप में सर्वाधिक मुसलमान फ्रांस में निवास करते हैं।

इस्लामी चरमपंथ को रोकने हेतु प्रस्तावित फ्रांसीसी विधेयक के प्रमुख प्रावधान-

फ्रांस में बढ़ते इस्लामी चरमपंथ को रोकने के लिए एवं युवाओं को कट्टर इस्लाम के और रुझान को रोकने हेतु इस कानून को प्रस्तुत किया गया है जिसके प्रमुख प्रावधान निम्न है-

  1. इस कानून के द्वारा किसी भी धार्मिक निशान को पहनना फ्रांस में प्रतिबंधित कर दिया गया है जबकि पहले यह केवल सरकारी सेवाओं तक ही सीमित था।
  2. मस्जिदों पर सरकारी निगरानी एवं विदेशी वित्तपोषण को विनियमित करने हेतु इस कानून द्वारा फ्रांस में स्थापित मस्जिदों को विदेशों से चंदा लेने पर रोक लगा दी गई है।
  3. मस्जिदों से चरमपंथ की घटनाओं को बढ़ावा देने से रोकने हेतु इस कानून में इमाम के ट्रेनिंग पर निगरानी की व्यवस्था की गई है।
  4. इस कानून में सरकार को यह भी शक्ति प्रदान की गई है कि यदि सरकारी सब्सिडी से चल रहे कोई धार्मिक संस्थान गणतंत्र के मूल्यों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
  5. उदारवादी समुदाय के नेताओं को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान किया गया है जिससे वे चरमपंथी उग्रवादियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  6. इस कानून के द्वारा बच्चों के शिक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है एवं प्रयास किया किया गया है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा सके एवं स्कूल से इनके ड्रॉपआउट की संख्या न बढें। इसके साथ ही इस विधेयक के द्वारा बच्चों को मदरसे में दाखिला पर रोक लगाने हेतु बच्चों की होम स्कूलिंग के लिए कड़े मानदंड अपनाए गए हैं जिससे गुपचुप तरीके से फ्रांसीसी अभिभावक अपने बच्चों को इन मदरसों में प्रवेश में दिला सके।
  7. मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु अब बहु विवाह करने वाले इस्लामी नागरिक को फ्रांस में निवास करने हेतु नागरिक पत्र नहीं दिए जाएंगे। इसके साथ ही स्थानीय अधिकारियों को यह शक्ति दी गई है जिस वह सुनिश्चित कर सकें कि किसी भी महिला का जबरदस्ती निकाह ना हुआ हो।
  8. इसके साथ ही व्यापक रूप से निंदनीय प्रथा ‘महिलाओं के कौमार्य परीक्षण’ को अपराध बनाया गया है और ऐसा करने वाले डॉक्टरों को जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

फ्रांस के प्रस्तावित विधेयक के विरुद्ध प्रतिक्रिया-

  • फ्रांस के इस विधेयक की तीखी आलोचना कई देशों के द्वारा की गई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की लगातार आलोचना कर रहे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन, ने प्रस्तावित कानून को “खुला उकसावे” कहा है।
  • मिस्र के शीर्ष धर्मगुरु अल-अजहर के ग्रैंड इमाम ने मैक्रॉन के विचारों को “नस्लवादी” कहा है।
  • कुछ आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने प्रस्तावित कानूनों को वर्तमान मतदाताओं को अपने पक्ष में करने हेतु लाया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में शामिल हुए 79% लोगों ने यह स्वीकार किया है कि ” फ्रांस कट्टर इस्लामवाद के साथ युद्ध में है”।
  • इसके साथ ही ने इस विधेयक के आलोचकों ने यह भी आशंका जताई है कि यह कदम फ्रांसीसी मुसलमानों को कट्टरपंथी इस्लामवाद समेत अलगाव की ओर ले जा सकता है।
  • फ्रांस में कई उदारवादी मुस्लिम नेताओं ने खुलकर इस कानून का समर्थन किया है।

यह विधेयक राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

  • 2022 में राष्ट्रपति पद का चुनाव चुनाव होने वाला है एवं राष्ट्रपति मैक्रॉन पुनः मैदान में होंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है नुकसान की एक श्रृंखला का सामना करने के बाद वह फ्रांस के दक्षिणपंथी मतदाताओं से अपील कर रहे हैं। पिछले हुए चुनाव स्थानीय चुनाव में स्पष्ट हो जाता है कि राष्ट्रपति मैक्रॉन की पार्टी का आधार कमजोर हो रहा है। राष्ट्रपति मैक्रॉन खुद को लेफ्ट विंग विचारधारा और राइट विंग विचारधारा से अलग बताते हैं जिसके कारण राइट विंग विचारधारा के लोग मैक्रॉन की इस्लामिक कट्टरपंथ पर कड़े कदम उठाने की खुलकर आलोचना कर रहे हैं।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

हिमालयन ट्रिलियम

  1. हाल ही में, हिमालय में पायी जाने वाली एक आम जड़ी बूटीहिमालयन ट्रिलियम को आईसीयूएन (IUCN) द्वारासंकटग्रस्त’ (endangered) घोषित किया गया है।
  2. यह जड़ी-बूटी मानवों के लिए विभिन्न रूपों में उपयोगी है, अतः इसका अत्याधिक दोहन किया जाता है।
  3. यह 2400 मीटर से 4000 मीटर की ऊँचाई पर हिमालय के समशीतोष्ण और उप-अल्पाइन क्षेत्र में उगती है।
  4. यह बूटी भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान में पायी जाती है।

 

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