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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

इनर-लाइन परमिट

G.S. Paper-III

संदर्भ:

मेघालय की सिविल सोसाइटी समूहों द्वारा ब्रिटिश-कालीन इनर-लाइन परमिट (Inner Line Permit- ILP) को लागू करने की मांग फिर से तेज की गयी है।

मेघालय में इनर-लाइन परमिट की मांग का कारण-

मेघालय में इनर-लाइन परमिट की मांग का प्रमुख कारण, पूर्वोत्तर की स्थानीय आबादी के बीच अवैध आप्रवासियों के प्रवाह’, इसका प्रभाव और दीर्घकालिक नुकसान का डर है। पूर्वोत्तर भारत की सीमाएं चीन, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान जैसे देशों के साथ लगी हुई हैं।

इनर लाइन परमिट (ILP) क्या है?

इनर लाइन परमिट, गैर-मूल निवासियों के लिए ILP प्रणाली के अंतर्गत संरक्षित राज्य में प्रवेश करने अथवा ठहरने हेतु आवश्यक दस्तावेज होता है।

वर्तमान में, पूर्वोत्तर के चार राज्यों, अरुणाचल प्रदेशमिजोरममणिपुर और नागालैंड में ILP प्रणाली  लागू है।

  1. इनर लाइन परमिट के द्वारा, किसी गैर-मूल निवासी के लिए, राज्य में ठहरने की अवधि तथा भ्रमण करने के क्षेत्र को निर्धारित किया जाता है।
  2. ILP कोसंबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है और इसे ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से आवेदन करके प्राप्त किया जा सकता है।

‘इनर-लाइन परमिट’ का तर्काधार-

इनर लाइन परमिट, बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट (BEFR) 1873 का एक विस्तार है। अंग्रेजों द्वारा कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों में प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले नियमों को बनाया गया था।

  1. पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली स्थानीय जनजातियाँ नियमित रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित चाय बागानों, तेल के कुओं और व्यापारिक चौकियों पर लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देती थी।
  2. इसलिए ये नियम, ब्रिटिश शासन के हितों की सुरक्षा हेतु कुछ राज्यों में ‘ब्रिटिश प्रजा’ अर्थात भारतीयों को इन क्षेत्रों में व्यापार करने से रोकने हेतु बनाए गए थे।
  3. वर्ष 1950 में, ‘ब्रिटिश प्रजा’ शब्द को ‘भारत के नागरिकों’ के साथ बदल दिया गया।
  4. वर्तमान में, सभी गैर-मूल निवासियों के लिए इन क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए परमिट की आवश्यकता होती है। यह नियम, इन राज्यों के स्थानीय आदिवासी समुदायों को शोषण से बचाने के लिए आज भी जारी हैं।

मेघालय में इनर-लाइन परमिट की आवश्यकता-

  1. राज्य में ‘अवैध आप्रवासियों के प्रवाह’ को रोकने के लिए इनर-लाइन परमिट को एकमात्र तंत्र माना जाता है। इस अवैध प्रवाह को काफी खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि यह मेघालय के आदिवासियों के नाजुक जनसांख्यिकीय संतुलन को नष्ट कर सकता है।
  2. अवैध प्रवाह, निश्चित रूप से चिंता का एक विषय है, लेकिन इसके लिए, दबाव समूहों द्वारा मांग की जा रही त्वरित समाधान के रूप में इनर-लाइन परमिट की नहीं बल्कि इससे बेहतर समाधान की आवश्यकता है। वास्तव में, इस तरह की दूरगामी नीति एक या दो समूहों द्वारा कैसे तय की जा सकती है?

 

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सही फसल अभियान

  1. इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जल मिशन के तहत की गयी थी, इसका उद्देश्य पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसानों को कम पानी की जरूरत वाली, पानी का कुशलता पूर्वक उपयोग, आर्थिक रूप से लाभप्रद, स्वास्थ्य और पोषण से भरपूर, क्षेत्र के कृषि-जलवायु-जलीय विशेषताओं के अनुकूल और पर्यावरण के अनुकूल फसलों को उगाने के लिए प्रेरित करना था।
  2. सही फसलअभियान के तहत उपयुक्त फसलों के उत्पादन, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा में नमी संरक्षण आदि पर किसानों के बीच जागरूकता पैदा करना; अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों जैसे धान, गन्ना, मक्का इत्यादि से किसानों को दूर रखना, और अंततः किसानों की आय में वृद्धि करने पर ध्यान केंद्रित किये जाने वाले प्रमुख बिंदु है।

 

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