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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आर्मीनिया-अज़रबैजान संघर्ष

1st October, 2020

G.S. Paper-III (International)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नोकाराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र को लेकर शुरू हुई जंग और तेज होती नजर आ रही है। दोनों देशों ने अब एक-दूसरे के इलाके में हमले करने का आरोप लगाया है।

क्यों है आर्मीनिया-अज़रबैजान के मध्य विवाद ?

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद आर्मीनिया और अज़रबैजान, दोनों ही देश रूसी साम्राज्य से स्वतंत्र हुए थे। स्वतंत्र होने के बाद दोनों देशों में नागोर्नो- काराबाख क्षेत्र को लेकर मतभेद व्याप्त हो गए।
  • जिसके चलते तत्कालीन सोवियत सरकार ने लगभग 95 प्रतिशत अर्मेनियाई आबादी वाले नागोर्नोकाराबाख क्षेत्र को अज़रबैजान के भीतर एक स्वायत्त क्षेत्र बना दिया।
  • हालाँकि नागोर्नो-काराबाख के स्वायत्त क्षेत्र बनने के बाद भी, इसको लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच विवाद जारी रहा, किन्तु सोवियत संघ के चलते यह विवाद बड़े संघर्ष का रूप नहीं ले सका
  • वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद नागोर्नो-काराबाख स्वायत्त क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच संघर्ष ने ज़ोर पकड़ लिया। नागोर्नो-काराबाख स्वायत्त क्षेत्र ने एक जनमत संग्रह के माध्यम से स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया, वहीं अज़रबैजान ने इस जनमत संग्रह को मानने से इनकार कर दिया
  • 1991 से लेकर आज तक नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच संघर्ष होता रहता है।
  • वर्तमान में आर्मेनिया समर्थित कुछ स्थानीय अलगाववादी सैन्य समूह नागोर्नो-काराबाख के कुछ क्षेत्र पर कब्ज़ा किये हुए हैं।

नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र के बारे में-

  • यह दक्षिणपश्चिमी अज़रबैजान में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है, जो लगभग 4,400 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह एक स्थलबद्ध (land-locked) क्षेत्र है।
  • नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र, आर्मेनिया की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है।
  • नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र, आर्मीनिया और अज़रबैजान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण इस क्षेत्र है।

द्वितीय राष्ट्रीय सीरो–सर्वेक्षण

G.S. Paper-II (National)

सन्दर्भ

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा द्वितीय राष्ट्रीय सीरोसर्वेक्षण के परिणाम जारी किए गए हैं।

सीरो–सर्वेक्षण क्या है?

इस प्रकार के सर्वेक्षण में रक्त के नमूनों में IgG नामक एक विशिष्ट वर्ग के एंटीबॉडी की जाँच की जाती है, जो संक्रमण के पश्चात् दो सप्ताह के अंदरअंदर ही दिखाई देता है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एंटीबॉडी हमारे शरीर में कितने समय तक उपस्थित रहती हैं, अतः उनकी उपस्थिति वायरस के केवल अतीत के जोखिम को दर्शाती है वर्तमान के जोखिम को नहीं।

नवीनतम सर्वेक्षण के निष्कर्ष:

  • अगस्तके उत्तरार्ध तक भारत की लगभग 7% वयस्क जनसंख्या नोबल कोरोनोवायरस के संपर्क में आ सकती है। यह परिषद् द्वारा 21 राज्यों के 70 जिलों में किए गए प्रथम सीरो-सर्वेक्षण द्वारा निर्धारित मई की शुरुआत तक संक्रमितों की संभावित संख्या में लगभग 10 गुना वृद्धि को दर्शाता है।
  • प्रथमसर्वेक्षण के दौरानयह सामने आया कि COVID19 पॉजिटिव केस की पुष्टि के लिए  संक्रमणों की संख्या 82-130 थी। यह संख्या अब 26-32 हो गई है।
  • यह सामने आया कि प्रत्येक COVID-19 पॉजिटिव केस की पुष्टि के लिए 82-130 संक्रमण थे। यह संख्या अब 26-32 हो गई है। हालांकि, यह संख्या यह भी दर्शाती है किदेश में अभी भी जनसंख्या का एक बड़ा भाग वायरस के संपर्क नहीं आया है और इसलिए, भारत किसी भी चरम या हर्ड इम्युनिटी स्तर से अत्यंत दूर है।
  • वायरस के देश व्यापी प्रसार की दर संयुक्त राज्य अमेरिका के समान ही थी, जो कि लगभग3% थी। ब्राजील और स्पेन में यह दर क्रमशः 2.8% और 4.6% थी।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण

G.S. Paper-III (Science)

भारत ने ओडिशा स्थित एक प्रक्षेपण स्थल से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का 30 सितम्बर 2020 को सफल प्रायोगिक परीक्षण किया.

400 किमी है मिसाइल की मारक क्षमता-

  • ओडिशा के बालासोर में 30 सितम्बर 2020 को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया. यह मिसाइल 400 किलोमीटर तक वार करने में सक्षम है. डीआरडीओ ने यह परीक्षण अपने पीजे-10 परियोजना के तहत किया है. इस टेस्ट के लिए मिसाइल को देसी बूस्टर से लक्ष्य पर दागा गया. यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के एक्सटेंडेड रेंज वर्जन का दूसरा सफल परीक्षण है. मिसाइल को समुद्र, जमीन और लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है.

मिसाइल के एक्सटेंडेड रेंज वर्जन का पहला परीक्षण-

  • इससे पहले दिसंबर में 290 किलोमीटर रेंज के ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण हुआ था. ब्रह्मोस के नए संस्करण का प्रपल्शन सिस्टम, एयरफ्रेम समेत कई महत्वपूर्ण उपकरण भारत में ही विकसित किए गए हैं. ब्रह्मोस को भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओएम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. ब्रह्मोस दुनिया की अपनी तरह की इकलौती क्रूज मिसाइल है, जो सुपरसोनिक स्पीड से दागी जा सकती है. भारतीय सेना के तीनों अंगों के लिए ब्रह्मोस मिसाइल के अलगअलग संस्करण बनाए गए हैं.

विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल-

  • ब्राह्मोस मिसाइल मध्यम रेंज की रेमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इस मिसाइल को पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान तथा जमीन से दागा जा सकता है. यह मिसाइल पहले से ही भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पास है. इसे विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है.

मिसाइल की विशेषता-

  • यह मिसाइल4 मीटर लंबा तथा 0.6 मीटर चौड़ा है तथा इसका वजन 3000 किलोग्राम है. यह मिसाइल 300 किलोग्राम वजन तक विस्फोटक ढोने तथा 300 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक प्रहार करने की क्षमता रखता है. यह सुपरसोनिक रूस मिसाइल आवाज की गति से भी 2.8 गुना तेज जाने की क्षमता रखता है. इस मिसाइल को पानी जहाज हवाई जहाज जमीन एवं मोबाइल लांचर से छोड़ा जा सकता है. इस मिसाइल को किसी भी दिशा एवं लक्ष्य की ओर मनचाहा तरीके से छोड़ा जा सकता है. यह मिसाइल घनी शहरी आबादी में भी छोटे लक्ष्यों को भी सटीकता से भेदने में सक्षम है.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

Flash Floods

  • हाल ही में असम के कुछ गांव आकस्मिक बाढ़ से जलमग्न हो गए हैं.
  • निम्न जलस्तर में त्वरित वृद्धि और प्रवाह का मंद होना तथा अत्यधिक जल विसर्जन आकस्मिक बाढ़ या फ्लैश फ्लड की विशेषताएं हैं, जिसके अचानक घटित होने के कारण अत्यंत नुकसान होता है.
  • फ्लैश फ्लड अधिकतर पहाड़ी (अति-पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं) क्षेत्रों और ढलान वाली भूमि पर आती है, जहां अत्यधिक वर्षा या मेघ प्रस्फुटन (cloudbursts) की घटनाएँ सामान्य हैं.
  • अन्य कारणों में ढाल पर ऊपर की ओर स्थित जलाशयों से जल का अकस्मात निर्गमन, भूस्खलन आदि के कारण बांधों की दीवारों और नदी तटबंधों के टूट जाने से होने वाला जल निकास इत्यादि हैं.

 

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