Online Portal Download Mobile App English ACE +91 9415011892 / 9415011893

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आयुष्मान सहकार योजना

20th October, 2020

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों ?

  • 19 अक्टूबर, 2020 को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आयुष्मान सहकार योजना शुरू की। यह योजना देश में सहकारी समितियों की सहायता के लिए शुरू की गई है। यह योजना सहकारी समितियों को देश में स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायता करेगी।
  • आयुष्मान सहकार योजना को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा तैयार किया गया था। एनसीडीसी योजना के तहत सहकारी समितियों को 10,000 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान करेगा। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता और कार्यशील पूंजी शामिल है। यह योजना सहकारी समितियों को 1% ब्याज उपदान प्रदान करती है जहाँ महिलाएँ बहुमत में हैं।
  • यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 के साथ संरेखित है। इस योजना का उपयोग सहकारी अस्पतालों की सहायता के लिए किया जाएगा। यह स्वास्थ्य बीमा, चिकित्सा, नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल शिक्षा को भी कवर करेगा। साथ ही, इस योजना में आयुष जैसी स्वास्थ्य प्रणालियाँ भी शामिल हैं।
  • यह योजना स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह भारत सरकार की किसान कल्याण गतिविधियों को मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय विकास सहकारी विकास निगम-

  • यह एनसीडीसी अधिनियम, 1963 के तहत स्थापित किया गया था। यह कृषि और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित होता है। यह कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, आयात और निर्यात से संबंधित कार्यक्रमों की योजना, प्रचार और वित्त प्रदान करता है। यह ग्रामीण औद्योगिक सहकारी क्षेत्रों में परियोजनाओं का वित्तपोषण करता है।
  • एनसीडीसी का वित्त पोषण भारत सरकार, अंतर्राष्ट्रीय सहायता और बाजार उधार द्वारा आवंटन के माध्यम से होता है।

आयुष-

  • आयुष सहकार योजना में आयुष सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में आयुष उपाय को भारत सरकार अत्यधिक महत्व दे रही है। पारंपरिक आयुष उपायों के माध्यम से, भारत सरकार देश की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहती  है। टीके परीक्षणों के साथ-साथ आयुष आधारित दवाओं के लिए भी धन आवंटित किया गया था।
  • 1 अक्टूबर, 2020 तक 58 आयुर्वेद आधारित COVID-19 परीक्षण पंजीकृत किए गए थे। इनमें से 70% भारत सरकार द्वारा प्रायोजित थे।

बीएस VI अनुपालन वाहन मानक

G.S. Paper-III (Environment)

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि कि देश भर में वायु प्रदूषण में कमी के लिए एक समग्र दृष्टिकोण लागू किया जा रहा है और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के माध्यम से पर्यावरण मंत्रालय देश भर के 122 शहरों में इसे लागू कर रहा है। एनसीएपी ने देश भर में 2024 तक पीएम10 और पीएम2.5 सांद्रता में 20 से 30% की कमी हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
  • अच्छी गुणवत्ता की वायु के दिनों की संख्या, 2016 में 106 के मुकाबले 2020 में बढ़कर 218 हो गई है और खराब गुणवत्ता वाले वायु दिनों की संख्या घटकर 2020 में घटकर 56 हो गई, जबकि 2016 में 01 जनवरी से 30 सितंबर तक 156 हो गई थी।
  • देश भर में अप्रैल 2020 से बीएस VI अनुपालन वाहन मानक की शुरुआत को वाहन प्रदूषण में कमी लाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए श्री जावडेकर ने कहा कि बीएस VI  ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद की। बीएस VI ईंधन वाली डीजल कारों में नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को 70% कम करता है, पेट्रोल कारों में 25% और वाहनों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) को 80% तक कम करता है।

क्या है NCAP?

  • नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम या NCAP केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2019 में शुरू किया गया एक सरकारी कार्यक्रम है।
  • यह वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिये व्यापक और समयबद्ध रूप से बनाया गया पाँच वर्षीय कार्यक्रम है।
  • इसका प्रमुख लक्ष्य वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के लिये काम करना है।
  • देश के ज्यादातर शहरों में गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिये पर्यावरण मंत्रालय की इस देशव्यापी योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 102 प्रदूषित शहरों की वायु को स्वच्छ करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसके तहत 2017 को आधार वर्ष मानते हुए वायु में मौज़ूद PM 2.5 और PM10 पार्टिकल्स को 20 से 30 फीसदी तक कम करने का ‘अनुमानित राष्ट्रीय लक्ष्य’ रखा गया है।
  • दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में ई-मोबिलिटी की राज्य-स्तरीय योजनाएँ, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी से वृद्धि, बीएस-VI मानदंडों का कड़ाई से कार्यान्वयन, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देना और प्रदूषणकारी उद्योगों के लिये तीसरे पक्ष के ऑडिट को अपनाना भी NCAP में शामिल हैं।
  • NCAP केवल एक योजना है और कानूनन बाध्यकारी नहीं है तथा इसमें ई दंडात्मक कार्रवाई करने या जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।

क्या है NCAP का लक्ष्य?

  • NCAP को बनाते समय उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों और राष्ट्रीय अध्ययनों को मद्देनज़र रखा गया है। इसमें यह ध्यान रखा गया है कि वायु प्रदूषण कम करने वाले अधिकांश कार्यक्रम पूरे देश के लिये न होकर शहर विशेष के लिये बनाए जाएं, जैसा कि विदेशों में देखने को मिलता है। उदाहरण के लिये, बीजिंग और सियोल जैसे शहर, जिनमें ऐसे विशिष्ट कार्यक्रम चलाने के बाद पाँच वर्षों में PM2.5 के स्तर में 35 से 40 फीसदी कमी देखने को मिली।
  • लेकिन विदेशों में ऐसे कार्यक्रम कितना भी सफल क्यों न रहे हों, उपरोक्त मात्रा में कमी होने बावजूद हमारे देश के अधिकांश शहरों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहेगा। दिल्ली में वायु प्रदूषण का जो हाल है उसमें 2024 तक तक यदि 30 फीसदी की कमी हो भी जाती है तो उसके बाद भी प्रदूषण का स्तर खतरे की सीमा से बहुत अधिक रहेगा।

शहरों का चयन-

  • NCAP के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रदूषित शहरों की सूची से 102 शहरों को चुना गया है। इन शहरों का चयन राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (National Ambient Air Quality Monitoring Programme) के 2011-15 तक के डेटा के आधार पर किया गया है।
  • इन शहरों में से 94 में इन पाँच वर्षों में PM10 का स्तर लगातार सीमा से अधिक बना रहा तथा पाँच शहरों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर सीमा से अधिक पाया गया।
  • जहाँ तक सवाल PM2.5 का है तो 2015 तक के डेटा से पता चलता है कि इनमें से 16 शहर ऐसे हैं, जो NCAP का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अप्रैल 2018 के डेटाबेस से टॉप-10 शहरों को भी चुना गया, जिसमें विश्व के 15 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में थे .

भारत, कोविड-19 के उच्चत्तम प्रसरण दौर से बाहर

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ‘महामारी के भविष्य की कार्यवाही पर अध्ययन करने हेतु सात विशेषज्ञों का पैनल गठित किया गया था। इस विशेषज्ञ पैनल ने एक ‘मॉडलिंग स्टडीकोविड-19 इंडिया नेशनल सुपरमॉडल (COVID-19 India National Supermodel) शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत ने सितंबर में कोविड-19 के उच्चत्तम प्रसरण दौर को पार कर लिया है और यदि महामारी की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है, तो फरवरी माह तक देश मेंन्यूनतम मामले दर्ज होंगे।
  • दिसंबर माह में सक्रिय मामलों की संख्या 50,000 से कम रहेगी तथा इसके साथ ही, अगले साल की शुरुआत तक भारत में कोविड संक्रमण से प्रभावित मामलों की कुल संख्या 106 लाख रहने की उम्मीद है।
  • हालांकि, यह निष्कर्ष, इस अनुमान पर आधारित है कि, त्योहारों के दौरान तथा सर्दियों में फैलने वाले इस वायरस में कोई उत्परिवर्तन या तीव्रता नहीं होगी।

  • स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं के लिए संकट उत्पन्न करने में सक्षम ‘वायरस-संक्रमण में वृद्धि’ होने पर केवल उप-जिला स्तरों पर ही एक पूर्ण शटडाउन लागू किये जाने पर विचार किया जायेगा।
  • अब तक, देश की लगभग 30% आबादी वायरस के संपर्क में चुकी है।
  • अगर लॉकडाउन नहीं किया गया होता, तो भारत में जून माह तक संक्रमण का उच्चत्तम स्तर पहुच गया होता तथा 40-147 लाख व्यक्ति वायरस से प्रभावित हो चुके होते। यदि लॉकडाउन की शुरुआत 1 अप्रैल या मई से शुरू की जाती तो जुलाई तक 30-40 लाख लोगों के संक्रमित होने के साथ वायरस संक्रमण का उच्चत्तम स्तर पहुच गया होता।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

‘ईट राइट मूवमेंट’

  • इसे वर्ष 2018 मेंभारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा शुरू किया गया था।
  • इस आंदोलन का उद्देश्य तीन वर्षों में नमक / चीनी और तेल की खपत में 30% की कटौती करना है।
  • इसका उद्देश्य नागरिकों को सही भोजन विकल्प उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करना है।

 

नवीनतम समाचार

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow