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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आदिवासियों के लिए प्रौद्योगिकी पहल

16th October, 2020

G.S. Paper-II (Social Justice)

चर्चा में क्यों-

हाल ही में ट्राइफेड (TRIFED), आईआईटी कानपुर और छत्तीसगढ़ लघु वन उपज फेडरेशन द्वारा संयुक्त रूप से आदिवासियों के लिए प्रौद्योगिकी पहल की शुरुआत की गयी है।

आदिवासियों के लिए प्रौद्योगिकीपहल क्या है?

  • यह उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) कार्यक्रम के अंतर्गत ‘लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के सहयोग से TRIFED द्वारा शुरू किया गया एक कार्यक्रम है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और कौशल का दोहन करना तथावन धन विकास केंद्रों की स्थापना करके बाजार पर आधारित उद्यम मॉडल के माध्यम से उनकी आय को बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन कौशल को बेहतर करना है।

वन धन केंद्रक्या हैं?

  • जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत TRIFED द्वारा 28 राज्यों में वन उपज इकट्ठा करने वाले 6 लाख आदिवासीयों को मिलकर 1,200 वन धन विकास केंद्रों (VDVK)”की स्थापना की गयी है।
  • एक विशिष्ट VDVK में 15 स्वयं सहायता समूह सम्मिलित होते है, और प्रत्येक स्वयं सहायता समूह में 20 आदिवासी भागीदार होते हैं।

वन धन विकास केंद्रपहल के बारे में:

  • इस पहल का उद्देश्य जनजातीय संग्रहकर्ताओं एवं और कारीगरों के लघु वन उपज (MFP) केंद्रित आजीविका के विकास को बढ़ावा देना है।
  • यह जमीनी स्तर पर MFP के अलावा प्राथमिक स्तर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर आदिवासी समुदाय को प्रोत्साहित करती है।
  • महत्व: इस पहल के माध्यम से, गैर-इमारती लकड़ी के उत्पादन मूल्य श्रृंखला में आदिवासियों की हिस्सेदारी वर्तमान 20% से बढ़कर लगभग 60% तक होने की उम्मीद है।

फ्लाई ऐश

G.S. Paper-III (Environment)

संदर्भ:

ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा विद्युत् उत्पादन के दौरान उत्सर्जित होने वाले उप-उत्पाद का शत-प्रतिशत उपयोग हासिल करने हेतु फ्लाई ऐश की आपूर्ति करने के लिए सीमेंट निर्माताओं के साथ सहयोग आरम्भ किया गया है।

‘फ्लाई ऐश’ क्या होती है?

इसे आमतौर ‘चिमनी की राख’ अथवा चूर्णित ईंधन राख’ (Pulverised Fuel Ash) के रूप में जाना जाता है। यह कोयला दहन से निर्मित एक उत्पाद होती है।

फ्लाई ऐश का गठन-

यह कोयलाचालित भट्टियों (Boilers) से निकलने वाले महीन कणों से निर्मित होती है।

  • भट्टियों में जलाये जाने वाले कोयले के स्रोत तथा उसकी संरचना के आधार पर, फ्लाई ऐश के घटक काफी भिन्न होते हैं, किंतु सभी प्रकार की फ्लाई ऐश में सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO2), एल्यूमीनियम ऑक्साइड (Al2O3) और कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) पर्याप्त मात्रा में होते हैं।
  • फ्लाई ऐश के सूक्ष्म घटकोंमें, आर्सेनिक, बेरिलियम, बोरोन, कैडमियम, क्रोमियम, हेक्सावलेंट क्रोमियम, कोबाल्ट, सीसा, मैंगनीज, पारा, मोलिब्डेनम, सेलेनियम, स्ट्रोंटियम, थैलियम, और वैनेडियम आदि पाए जाते है। इसमें बिना जले हुए कार्बन के कण भी पाए जाते है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी खतरे-

  • विषाक्त भारी धातुओं की उपस्थति:फ्लाई ऐश में पायी जाने वाली, निकल, कैडमियम, आर्सेनिक, क्रोमियम, लेड, आदि सभी भारी धातुएं प्रकृति में विषाक्त होती हैं। इनके सूक्ष्म व विषाक्त कण श्वसन नालिका में जमा हो जाते हैं तथा धीरे-धीरे विषाक्तीकरण का कारण बनते रहते हैं।
  • विकिरण: परमाणु संयंत्रो तथा कोयला-चालित ताप संयत्रों से समान मात्रा में उत्पन्न विद्युत् करने पर, परमाणु अपशिष्ट की तुलना में फ्लाई ऐश द्वारा सौ गुना अधिक विकिरण होता है।
  • जल प्रदूषण:फ्लाई ऐश नालिकाओं के टूटने और इसके फलस्वरूप राख के बिखरने की घटनाएं भारत में अक्सर होती रहती हैं, जो भारी मात्रा में जल निकायों को प्रदूषित करती हैं।
  • पर्यावरण पर प्रभाव:आस-पास के कोयला आधारित विद्युत् संयंत्रों से उत्सर्जित होने वाले राख अपशिष्ट से मैंग्रोव का विनाश, फसल की पैदावार में भारी कमी, और कच्छ के रण में भूजल के प्रदूषण को अच्छी तरह से दर्ज किया गया है।

फ्लाई ऐश का उपयोग-

  1. कंक्रीट उत्पादन, रेत तथा पोर्टलैंड सीमेंट हेतु एक वैकल्पिक सामग्री के रूप में।
  2. फ्लाई-ऐश कणों के सामान्य मिश्रण को कंक्रीट मिश्रण में परिवर्तित किया जा सकता है।
  3. तटबंध निर्माण और अन्य संरचनात्मक भराव।
  4. सीमेंट धातुमल उत्पादन – (चिकनी मिट्टी के स्थान पर वैकल्पिक सामग्री के रूप में)।
  5. नरम मिट्टी का स्थिरीकरण।
  6. सड़क निर्माण।
  7. ईंट निमार्ण सामग्री के रूप में।
  8. कृषि उपयोग: मृदा सुधार, उर्वरक, मिट्टी स्थिरीकरण।
  9. नदियों पर जमी बर्फ पिघलाने हेतु।
  10. सड़कों और पार्किंग स्थलों पर बर्फ जमाव नियंत्रण हेतु।

दीनदयाल अंत्योदय योजना

G.S. Paper-II (Welfare Scheme)

संदर्भ-

  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीयमंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2023-24 तक, पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रशासित प्रदेश जम्मूकश्मीर और लद्दाख को 520 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मंजूरी दी और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इस विस्तारित अवधि के दौरान आवंटन को गरीबी अनुपात से जोड़े बिना मांग जनित आधार पर दीनदयाल अंत्योदय योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY–NRLM) का वित्त पोषण सुनिश्चित करने की भी स्वीकृति दी.
  • इन केंद्रशासित प्रदेशों की जरूरत के आधार पर इस मिशन के तहत पर्याप्त धन सुनिश्चित होगा और यह एक समयबद्ध तरीके से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीरऔर लद्दाख में सभी केंद्र प्रायोजित लाभार्थीउन्मुख योजनाओं को सार्वभौमिक बनाने के भारत सरकार के उद्देश्य के भी अनुरूप है. यह ग्रामीण परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और महिलाओं के सशक्तिकरण तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बदली हुई परिस्थितियों के लिए इस मिशन की क्षमता की ओर संकेत करने वाले आकलन के परिणामों पर आधारित है.

पृष्ठभूमि-

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) को पूर्ववर्ती राज्य जम्मूकश्मीर मेंउम्मीद’ (Umeed) कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया था. इस मिशन के अंतर्गत वित्त का आवंटन राज्यों के बीच पारस्परिक गरीबी के अनुपात में किया जाता है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को इस मिशन के तहत कुल राशि का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिल पाता था.

लाभ-

  • इससे इन केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) की आवश्यकता के आधार पर इस मिशन के अंतर्गत पर्याप्त धन सुनिश्चित किया जा सकेगा यह विशेष पैकेज समयबद्ध प्रकार से केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को सार्वभौमिक बनाने के भारत सरकार के उद्देश्य के भी अनुरूप है.
  • अब विशेष पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की लगभग दो-तिहाई ग्रामीण महिलाओं को कवर किया जाएगा और आगामी पाँच वर्ष तक 520 करोड़ रुपए के इस विशेष पैकेज का लाभ तकरीबन58 लाख महिलाओं को मिल सकेगा.
  • जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए भारत सरकार ने तर्क दिया था कि इस निर्णय के माध्यम से भारत के अन्य क्षेत्रों में लागू किये गए कानून और कल्याण योजनाओं को जम्मू-कश्मीर में भी लागू किया जा सकेगा, जिससे इस क्षेत्र का विकास भी सुनिश्चित होगा. इससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आम लोगों के जीवन एवं उनकी आजीविका में सुधार होगा तथा यह सुनिश्चित होगा कि आम लोग आतंकवादी समूहों में शामिल न हों.

दीन दयाल अन्त्योदय योजना-

  • दीन दयाल अंत्योदय योजनाजून 2011 में ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD), भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय आजीविका मिशन (NRLM) द्वारा शुरू की गई थी.
  • यह मिशन गाँव के गरीब लोगों को आर्थिक रूप से उन्नत होने के लिए एक मंच प्रदान करता है जिससे ग्रामीण व्यक्ति स्वयं सहायता समूह बनाकर विभिन्न प्रकार की आजीविकाएँ चलाते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
  • इस योजना का उद्देश्य यह भी रहा है कि ऐसे समूह बैंकों से भी जुड़े.
  • इस मिशन के तहत प्रत्येक जिले में हर वर्षसरस मेला (SARAS MELA) का आयोजन किया जाता है.
  • इस मेले में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किये गये विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया जाता है. यहाँ उनकी बिक्री होती है.
  • आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजनाभी दीन दयाल अन्त्योदय योजना – NRLM के तहत आती है. इसमें राज्य सरकारें अपने पिछड़े क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक यातायात के संचालन का अवसर प्रदान करती है.
  • इससे यह होगा कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में आपसी संपर्क बढ़ेगा और SHGs की आय में वृद्धि होगी.

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सभी FCRA खातों के लिए SBI शाखा

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय नेविदेशी अनुदान स्वीकार करने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों से 31 मार्च, 2021 तक भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली शाखा में एक निर्दिष्ट FCRA खाता खोलने के लिए को कहा है।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution (Regulation) Act- FCRA) के तहत पंजीकृतगैर सरकारी संगठन (NGO) 1 अप्रैल 2021 के पश्चात किसी अन्य बैंक खाते में कोई विदेशी अनुदान दान स्वीकार नहीं कर सकेंगे।
  • वर्तमान में, देश मेंFCRA के तहत 22,434 गैर सरकारी संगठन (NGO) तथा एसोसिएशन कार्यरत हैं।

पृष्ठभूमि: सितंबर में, संसद द्वारा विदेशी अनुदान (विनियमन) अधिनियम, 2020 में संशोधन किया गया था, जिसमे एक नए प्रावधान के तहत सभी गैर-सरकारी संगठनों और एसोसिएशन के लिए एसबीआई की नई दिल्ली शाखा में निर्धारित बैंक खाते में विदेशी धन प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।

 

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