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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आकाशगंगा XMM-2599

समाचार में क्यों?

हाल ही में खगोलविदों की अंतर्राष्ट्रीय टीम ने एक आकाशगंगा XMM-2599 की खोज की है। आकार में असामान्य रूप से बड़ी यह आकाशगंगा लगभग 12 अरब वर्ष पूर्व अस्तित्व में थी। इसके अस्तित्त्व के समय ब्रह्मांड महज़ 1.8 बिलियन वर्ष पुराना था।

  • बिग बैंग की घटना (जो कि 13.8 बिलियन वर्ष पूर्व हुई) और 12 बिलियन वर्ष के मध्य किसी समय इसमें तीव्र विस्फोट हुआ और तारों का तीव्र गति से निर्माण हुआ लेकिन यह विकास प्रक्रिया अचानक से बंद हो गई। इस परिघटना के पीछे की वज़हें अब भी अस्पष्ट हैं।
  • आकाशगंगा XMM-2599 ने ब्रह्माण्ड की आयु 1 अरब वर्ष होने से पूर्व ही 300 बिलियन तारों (सोलर मास) का विकास कर लिया था और ब्रह्माण्ड की आयु 1.8 अरब वर्ष होने तक यह निष्क्रिय भी हो गई।
  • खगोलविदों ने कुछ वर्ष पूर्व ZF-COSMOS-20115 नामक एक अन्य विशालकाय आकाशगंगा की भी खोज की थी जिसकी उत्पत्ति ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के 1.7 अरब वर्ष बाद हुई थी किंतु अचानक इसमें तारों का निर्माण बंद हो गया। हालाँकि ZF-COSMOS-20115 में XMM-2599 के सोलर मास की तुलना में केवल 170 अरब सोलर मास मौजूद थे।
  • वर्ष 2008 में EQ J100054+023435 नामक एक आकाशगंगा की खोज की गई थी जिसमें तारों का निर्माण प्रतिवर्ष 1,000 से अधिक सोलर मास की दर से हुआ था। आकर में यह आकाशगंगा XMM-2599 से बहुत छोटी है जिसमें केवल 10 अरब सोलर मास हैं।
  • अवलोकनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि विशाल आकार प्राप्त करने हेतु इस आकाशगंगा में 500 मिलियन वर्षों तक लगभग 1,000 सौर द्रव्यमान प्रतिवर्ष की दर से तारों का निर्माण हुआ होगा।
  • हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी (Milky Way) में प्रतिवर्ष 3 से 4 सौर द्रव्यमान ही निर्मित होते हैं।

अब तक के शोध से विपरीत परिघटना :

  • खगोलविदों के मध्य अब तक यह मान्यता थी कि शुरुआती ब्रह्माण्ड में इतनी बड़ी आकाशगंगा का निर्माण नहीं हुआ होगा। हालाँकि हमारी तकनीक के उन्नत होने और दिक्-काल के दूरगामी क्षेत्रों में पहुँच स्थापित होने के साथ ही इन धारणाओं को चुनौती मिल रही है।
  • इस खोज से यह पता चला है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में बड़े पैमाने पर सोलर मास निर्मित हो रहे थे जो ब्रह्मांड संबंधी हमारे मॉडल से अलग है।

संख्यात्मक (Numerical) मॉडल अब XMM-2599 जैसी विशाल आकाशगंगाओं की गणना कर सकते हैं किंतु शुरुआती चरण में तारों का तीव्रता से निर्माण और फिर इस प्रक्रिया के अचानक से रुक जाने की परिघटना शोध और आश्चर्य का विषय बनी हुई है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

‘किलिकीभाषा :

  • राजामौली के निर्देशन में बनी सुपरहिट फिल्म ‘बाहुबली’ में कालकेय जनजाति (Kaalakeya Tribe) की भाषा ‘किलिकी (Kiliki) को लोकप्रिय बनाने के लिये एक वेबसाइट की शुरुआत की गई।

वेबसाइट:

  • इस भाषा को बाहुबली फिल्म में गीतकार एवं फिल्म संवाद लेखक ‘मधन कार्की ने लगभग 750 शब्दों और 40 व्याकरण के नियमों द्वारा विकसित किया था।
  • मधन कार्की ने अंक और अक्षरों को मिलाकर कुल 22 प्रतीक बनाए हैं। जिनको आसानी से रिकॉल किया जा सकता है।
  • कार्की रिसर्च फाउंडेशन (Karky Research Foundation) किलिकी भाषा सीखने वालों के लिये नौकरी के अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है और उसका यह प्रयास है कि किलिकी भाषा जाति, धर्म, नस्ल या देश की बाधाओं से परे दुनिया को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

 

कालकेय जनजाति (Kaalakeya Tribe) के बारे में

Ø कालकेय (Kaalakeya) हिंदू पौराणिक कथाओं में असुरों का एक वर्ग है। यह दानवों का एक शक्तिशाली, क्रूर एवं हिंसक कबीला था।

Ø कालकेय वैश्वानर (दानू का पुत्र) की पुत्री ‘कालका के वंशज थे। दानू एक आदिम देवी थी जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, जो कि असुरों की माँ थी।

Ø बौद्ध धर्म में इन्हें कालकांजक (Kalakanjaka) कहा जाता है। इनका उल्लेख बौद्ध ग्रंथ महासमय सुत्त (Mahasamaya Sutta) में किया गया है।

  • Kala Kumbh :
  • भौगोलिक संकेतक वाले शिल्पों और धरोहरों को बढ़ावा देने के लिए कपड़ा मंत्रालय देश के कई भागों में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के कार्यालयों के माध्यम से कला कुम्भ नामक प्रदर्शनी शृंखला आयोजित करने जा रहा हैI
  • इन प्रदर्शनियों को हस्तशिल्प निर्यात प्रोत्साहन परिषद् (Export Promotion Council for Handicrafts – EPCH) स्पोंसर कर रहा हैI

 

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