English Version | View Blog +91 9415011892/93

डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आंध्र सरकार में ST को 100% कोटा

समाचार में क्यों?    

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 1988 में अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में शिक्षक पदों के लिये अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes-ST) हेतु 100% आरक्षण दिये जाने के फैसले पर सवाल उठाया।

  • पाँच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का गठन आंध्र प्रदेश राज्य के तत्कालीन राज्यपाल द्वारा 1988 में जारी की गई अधिसूचना को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करने के लिये किया गया था।

क्या है संवैधानिक पीठ?

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के अनुसार, संविधान की व्याख्या के रूप में यदि विधि का कोई सारवान प्रश्न निहित हो तो उसका विनिश्चय करने अथवा अनुच्छेद 143 के अधीन मामलों की सुनवाई के प्रयोजन के लिये संवैधानिक पीठ का गठन किया जाएगा जिसमें कम-से-कम पाँच न्यायाधीश होंगे।
  • हालाँकि इसमें पाँच से अधिक न्यायाधीश भी हो सकते हैं जैसे- केशवानंद भारती केस में गठित संवैधानिक पीठ में 13 न्यायाधीश थे।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूछे गए प्रश्न:

  • सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल पूछा है कि ऐसी आरक्षण प्रणाली अपनाने पर अनुसूचित जाति (Scheduled Castes- SCs) और अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes- OBCs) क्या करेंगे? ये वर्ग समाज में काफी पिछड़े हुए हैं और यह व्यवस्था इन समुदायों को आरक्षण के लाभ से वंचित करती है।
  • पीठ ने यह भी जानने की कोशिश की है कि क्या यह निर्णय उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर लिया गया था या इसका आधार राजनीतिक विचारधारा को समर्थन प्रदान करना था?
  • अधिसूचना (Notification) जारी करने का आधार यह था कि STs ही उस क्षेत्र में एकमात्र वंचित समूह हैं, जबकि क्या इस बात को प्रमाणित करने वाला कोई डेटा उपलब्ध है कि कोई अन्य समूह उस क्षेत्र में वंचित नहीं है?

पीठ ने यह भी जानना चाहा कि दो दशक से अधिक पुराने इस “प्रयोग” से क्या परिणाम प्राप्त हुए हैं?

  • पीठ ने ‘संविधान की 5वीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

आरक्षण प्रणाली के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या :

  • इस तरह के भेदकारी प्रावधानों को दो दशकों से सहन किया जा रहा है यदि अभी भी इसकी अनुमति दी गई तो इस समस्या का कोई अंत नहीं होगा और अन्य राज्य भी ऐसे प्रावधान ला सकते हैं।
  • यह प्रणाली योग्य उम्मीदवारों के लिये भी दरवाज़े बंद कर देती है, यहाँ तक कि यह उनको आवेदन करने की भी अनुमति नहीं देती है।
  • राज्यपाल का निर्णय कानून से ऊपर नहीं हो सकता, अत: असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिये। (इंदिरा साहनी वाद का निर्णय)
  • जो आरक्षण दिया गया था वह व्यक्तिपरक (Subjective) था परंतु ऐसा करने के लिये पर्याप्त डेटा होना आवश्यक है।
  • अब हम एक ऐसी अवस्था में है कि संविधान को उसके वास्तविक अर्थों में संचालित करना बहुत कठिन है यहाँ तक ​​कि संविधान निर्माताओं ने भी ऐसी स्थिति की परिकल्पना नहीं की थी।
  • पीठ ने कहा कि दिये गए इस आरक्षण के साथ यह समस्या रही कि आरक्षण का लाभ उन लोगों को नहीं मिला जो वास्तव में इसके हक़दार थे।

K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल

समाचार में क्यों?    

भारत ने हाल ही में K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कियाI भारत ने 19 जनवरी 2020 को परमाणु हमला करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया हैI इस मिसाइल को नौसेना की स्वदेशी आईएनएस अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित पनडुब्बी पर तैनात किया जाएगाI

आंध्र प्रदेश के समुद्री तट से दागी गई इस मिसाइल की मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर हैI यह मिसाइल पनडुब्बी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैI फिलहाल नौसेना के पास आईएनएस अरिहंत ही एकमात्र ऐसी पनडुब्बी है, जो परमाणु क्षमता से लैस हैI इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया हैI

इस मिसाइल की खासियत :

  • K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल को भारतीय नौसेना के स्वदेशी आईएनएस अरिहंत-श्रेणी के परमाणु-संचालित पनडुब्बियों पर तैनात किया जाएगा
  • इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के तट पर चांदीपुर रेंज में किया गयाI यह मिसाइल जमीन से हवा में सटीक निशाने को भेदने में सक्षम हैI
  • इसी मिसाइल की तरह पिनाका मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया जा चुका हैI अर्टिलरी मिसाइल सिस्टम ‘पिनाका’ से 90 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाया जा सकता हैI
  • परमाणु हमला करने में सक्षम पनडुब्बियों पर तैनात करने से पहले इस मिसाइल के कई और परीक्षणों से गुजरने की संभावना हैI मिसाइल का परीक्षण दिन में समुद्र के अंदर मौजूद प्लेटफॉर्म से किया गयाI
  • के-4 बैलिस्टिक मिसाइल को रफ्तार की वजह से कोई भी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम ट्रैक नहीं कर सकताI

बैलिस्टिक मिसाइल क्या है?

तकनीकी दृष्टि से बैलिस्टिक मिसाइल उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब ऑर्बिटल बैलिस्टिक पथ होता हैI इसका उपयोग किसी हथियार (नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर दागने हेतु किया जाता हैI यह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक स्तर पर ही गाइड की जाती हैI इसके बाद का पथ आर्बिटल मैकेनिक के सिद्धांतों पर एवं बैलेस्टिक सिद्धांतों से निर्धारित होता हैI इसे अभी तक रासायनिक रॉकेट इंजन से छोड़ा जाता थाI सबसे पहला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) A-4 थाI इसे सामान्यत V-2 रोकेट के नाम से भी जाना जाता हैI इस मिसाइल को नाज़ी जर्मनी ने साल 1930 से साल 1940 के मध्य में रोकेट वैज्ञानिक वेर्न्हेर वॉन ब्राउन की देखरेख में विकसित किया थाI

भारत विश्व के छह देशों में शामिल :

  • भारत जमीन, हवा और पानी के अंदर से परमाणु मिसाइल को दागने की क्षमता रखने वाले विश्व के महज छह देशों में शामिल हैI यह क्षमता भारत के अतिरिक्त अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के पास हैI

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट अवॉर्ड 2000-2020:

  • सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान प्रशंसकों के वोटों के आधार पर मिला हैI बर्लिन में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ ने सचिन तेंदुलकर को लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट अवॉर्ड 2000-2020 के विजेता बनने की घोषणा कीI
  • लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड का आयोजन हरेक साल होता हैI यह आयोजन खेल की दुनिया के खिलाड़ियों एवं टीमों को उनकी साल भर की उपलब्धियों हेतु सम्मानित किया जाता हैI यह पुरस्कार पहली बार 25 मई 2000 को दिए गए थेI

 

नवीनतम समाचार

    • Toppers Answer Sheets/ Model Answer 
    • UP/BIHAR PCS -J/APO MOCK TEST SERIES Starting from 28th March ,2020
    • IAS/PCS PRE & PRE CUM MAIN BATCHES FOR 2020/21 starting from 2nd April, 2020
    • New Evening Batches starting from 2nd April, 2020
    • PCS -J/ APO New Batches for 2020/21 Starting from 2nd April, 2020 (Law & GS)
    • Sociology optional Subject new Batch Starts on 2nd April, 2020 at 2 PM
    • Public Administration optional Subject new Batch Starts on 2nd April, 2020 at 2 PM

get in touch with the best IAS Coaching in Lucknow