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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

आंध्र प्रदेश के एलुरु में रहस्यमयी बीमारी

G.S. Paper-III

संदर्भ:

  • आंध्र प्रदेश के एलुरु शहर (Eluru in Andhra Pradesh) में रहस्यमय बीमारी (Mysterious Disease) से लगभग 550 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं।
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की टीम द्वारा रोगियों की जांच करने पर, इनके रक्त नमूनों में सीसा (lead) जैसे भारी तत्व पाए गए हैं।

बीमारी का कारण:

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, एलुरु शहर में पीने के पानी और दूध में निकल (Nickel) और सीसा (Lead) जैसे भारी तत्वों की मौजूदगी प्राथमिक रूप से रहस्यमय बीमारी का कारण है।

बीमारी के लक्षण:

इस बीमारी से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों द्वारा मिर्गी के दौरे पड़ने, घबराहट, उल्टी और सिरदर्द की शिकायतें की गयी। अब तक, यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैली है।

संबंधित चिंताएं:

रक्त के नमूनों में रसायनों की उपस्थिति काफी कम पायी गयी थी, जिससे मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। यदि विषाक्त पदार्थों की मात्रा अधिक होती, अथवा इसका हवा के माध्यम से प्रसरण होता, तो यह न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को प्रभावित कर सकता था।

सीसा-विषाक्तता के सामान्य कारक:

  1. लेड-एसिड बैटरियों का अनियमित और घटिया रीसाइक्लिंग
  2. वाहनों की संख्या में वृद्धि और साथ ही वाहन की बैटरी रीसाइक्लिंग से संबंधित विनियमन और बुनियादी ढांचे की कमी।
  3. खतरनाक और अक्सर अवैध रीसाइक्लिंग कार्यों में लगे अकुशल श्रमिक बैटरियों को खुली जगहों पर तोड़ते है, जिससे एसिड और सीसे की धूल (lead dust) मिट्टी में अवशोषित हो जाती है।
  4. इन श्रमिकों द्वारा अवशिष्ट सीसे को कच्ची, खुली भट्टियों में पिघलाया जाता है, जिससे जहरीले धुएं का उत्सर्जन होता है और यह आसपास के वातावरण को विषाक्त करता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

थारू जनजाति

संदर्भ:

हाल ही में, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा थारू जनजाति की अनूठी संस्कृति को विश्व में पहचान दिलाने हेतु एक योजना का आरम्भ किया गया है।

इस योजना में होम स्टे’ (Home Stay) सुविधाओं को तैयार किया जाना शामिल किया गया है। इसके तहत, मुख्यतः जंगलों से एकत्रित घासफूस से निर्मित पारंपरिक झोपड़ियों में पर्यटकों को थारू जनजाति के प्राकृतिक आवासों में रहने का अनुभव कराया जाएगा।

थारू जनजाति के बारे में:

  1. थारू जनजाति, शिवालिक और लघु हिमालय के तराई क्षेत्रोंमें पाई जाती है। इसके अधिकाँश सदस्य वनवासी हैं, और कुछ कृषि कार्य भी करते हैं।
  2. थारू शब्द की उत्पत्तिस्थाविरसे हुईहै, जिसका अर्थ है बौद्ध धर्म के थेरवाद संप्रदाय के अनुयायी।
  3. थारू, भारत और नेपाल दोनों में निवास करते हैं।भारतीय तराई क्षेत्र में, ये मुख्यतः उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में वसे हुए हैं।
  4. थारू महिलाओंको, उत्तर भारतीय हिंदू रीति-रिवाजों की महिलाओं की तुलना में संपत्ति संबंधी अधिक अधिकार प्राप्त होते है।

 

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