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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

अविश्वास प्रस्ताव

28th August, 2020

G.S. Paper-II (National)

 चर्चा में क्यों?

केरल में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस पार्टी केरल की पिनरई विजयन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (no confidence motion) लाने की तैयारी में है.

अविश्वास प्रस्ताव क्या है?

  • अविश्वास प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है जो किसी दल के द्वारा वर्तमान सरकार के विरुद्ध विचार के लिए लोक सभा में प्रस्तुत किया जाता है.
  • ऐसे प्रस्ताव में प्रस्तावक के द्वारा केन्द्रीय मंत्रिमंडल में कथित दोष, चूक और गलतियाँ दर्शाई जाती हैं और सरकार को बर्खास्त करने की माँग की जाती है.
  • अविश्वास प्रस्ताव स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि इस पर कम से कम50 सांसद अपना समर्थन दें.
  • ऐसा होने पर प्रस्ताव को विचार के लिए स्वीकृत कर लिया जाता है और अध्यक्ष इस पर बहस के लिए एक तिथि निर्धारित करता है.
  • अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा के अंत मेंप्रधानमंत्री आरोपों का उत्तर देते हैं और अंत में आवाज़ अथवा मतदान  के जरिये बहुमत का निर्णय सुनाया जाता है.
  • यदि अविश्वास प्रस्ताव सरकार में अपेक्षित मत नहीं प्राप्त करती है तो उसे इस्तीफ़ा देना होता है.
  • कोई प्रधानमन्त्री इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार न हो तोराष्ट्रपति स्वयं पहल करके उसे हटा सकता है. किन्तु ऐसा कभी नहीं हुआ है.
  • प्रधानमन्त्री के इस्तीफ़ा देने के बाद सरकार का काम चलाने के लिएप्रधानमंत्री को अंतरिम कार्यकारी प्रधानमंत्री घोषित किया जाता है.
  • ऐसा अंतरिम प्रधानमन्त्रीकोई बड़ा नीतिगति निर्णय नहीं ले सकता है.
  • इस प्रकार अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया मेंराज्यसभा की कोई भूमिका नहीं है.
  • इस विषय में आवश्यक प्रावधानRules of Procedure and Conduct of Business के नियम 198 में दिए गये हैं.
  • संविधान मेंअविश्वास प्रस्ताव का कोई उल्लेख नहीं है.

 

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण

(Armed Forces Tribunal– AFT)

 G.S. Paper-II (National)

संदर्भ-

हाल ही में, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की मुख्य न्यायपीठ द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्षेत्रीय न्यायपीठों से संबंधित मामलों के सुनवाई की शुरूआत की गयी है।

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के बारे में:

  1. यह भारत में एकसैन्य न्यायाधिकरण है।
  2. इसकी स्थापना वर्ष 2009 मेंसशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 के तहत की गई थी।
  3. सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम को169वें विधि आयोग की रिपोर्ट तथा उच्चत्तम न्यायालय के विभिन्न निर्देशों के आधार पर पारित किया गया था।

कार्य एवं शक्तियां:

यह सेना अधिनियम 1950, नौसेना अधिनियम 1957 और वायु सेना अधिनियम 1950 के अध्यधीन व्यक्तियों के बारे में कमीशन, नियुक्तियों, अभ्यावेशनों (enrolments) और सेवा शर्तों के संबंध में विवादों और शिकायतों का अधिनिर्णयन या सुनवाई करता है।

संरचना:

न्यायाधिकरण की प्रत्येक खंडपीठ में एक न्यायिक सदस्य तथा अन्य प्रशासनिक सदस्य होते हैं।

  1. न्यायिक सदस्यउच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है।
  2. प्रशासनिक सदस्यके रूप में मेजर जनरल/समकक्ष या इससे ऊपर रैंक के सेवानिवृत सैन्य बल अधिकारी शामिल होते हैं। जज एडवोकेट जनरल (Judge Advocate General– JAG), सेना का विधिक व न्यायिक प्रमुख, को भी प्रशासनिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का अध्यक्ष:

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के अध्यक्ष पद पर सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है।

अपवाद:

  1. असम राइफल्स तथा तटरक्षक बल (Coast Guard) सहित अन्य अर्धसैनिक बल, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर होते हैं।
  2. सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) कोभारतीय दंड संहिता, और दंड प्रक्रिया संहिता के संदर्भ में एक दाण्डिक न्यायालय माना जाता है।
  3. सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले के विरुद्ध अपीलकेवल उच्चतम न्यायालय में की जा सकती है। उच्च न्यायालयों को ऐसी अपीलों पर सुनवाई करने की अनुमति नहीं है।

 

आर्थिक वृद्धि के लिये आवश्यक सुधार

 G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा में क्यों?

मैक्किंज़े ग्लोबल इंस्टीट्यूट (McKinsey Global Institute-MGI) के अनुसार, कोरोना वायरस (COVID-19) काल के पश्चात् आर्थिक वृद्धि के नए अवसरों का निर्माण करने के लिये भारत को अगले एक दशक में अपनी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8-8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ाने की आवश्यकता है और यदि ऐसा नहीं होता है तो भारत आय स्थिरता के चक्र में फँस जाएगा।

प्रमुख बिंदु:

  1. मैक्किंज़े ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के संबंध में जारी अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत को अगले एक दशक में अपनी GDP 8-8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ाने के लिये कम-से-कम 90 मिलियन (9 करोड़) नए गैरकृषि रोज़गार का सृजन करना होगा
  2. अनुमान के अनुसार, भारतीय GDP में वित्त वर्ष 2020-21 में 3 से 9 प्रतिशत के बीच संकुचन हो सकता है। मौजूद वित्तीय वर्ष अर्थव्यवस्था का संकुचन पूर्णतः सरकार द्वारा कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण को रोकने तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिये उठाए गए कदमों की प्रभावशीलता पर निर्भर करता है।
  3. यदि भारत सरकार कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी और उसके कारण उत्पन्न हुए आर्थिक संकट को सही ढंग से प्रबंधित करने में असमर्थ रहती है, तो वर्ष 2023 से वर्ष 2030 तक भारत भारत की आर्थिक वृद्धि दर5 से 6.0 प्रतिशत के बीच ही रहेगी
  4. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वायरस के कारण उत्पन्न हुआ आर्थिक आघात देश की बैंकिंग प्रणाली को तनाव में डाल सकता है। यदि आम नागरिकों, छोटे व्यवसायियों और निगमों पर वित्तीय तनाव को कम नहीं किया गया तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में गैरनिष्पादित परिसंपत्तियों में 7-14 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
  5. रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के परिणामस्वरूप वर्ष 2030 तक गैरकृषि रोज़गार की तलाश कर रहे 90 मिलियन लोगों का कार्यबल मौजूद होगा।
  6. इस दौरान भारत को गैर-कृषि रोज़गार की सृजन की दर को तिगुना करना होगा। गौरतलब है कि वर्ष 2013 से वर्ष 2018 की अवधि के बीच भारत में प्रतिवर्ष 4 मिलियन गैर-कृषि रोज़गार का सृजन किया गया था।
  7. ध्यातव्य है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस संक्रमण से पूर्व ही संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही थी, जिससे देश की GDP वृद्धि वित्त वर्ष 2020 में घटकर2 प्रतिशत रह गई थी।

कोरोना महामारी और बेरोज़गारी की समस्या:

  • बीते दिनों सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (Centre for Monitoring Indian Economy-CMIE) ने लॉकडाउन अवधि (अप्रैल-जुलाई 2020) के दौरान रोज़गार से संबंधित आँकड़े जारी किये थे, जिसमें सामने आया था कि अप्रैलजुलाई 2020 के दौरान वेतनभोगी श्रेणी के कुल 18.9 मिलियन लोगों को रोज़गार के नुकसान का सामना करना पड़ा था।
  • शहरी वेतनभोगी नौकरियों की हानि से अर्थव्यवस्था पर विशेष रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है, इसके अलावा मध्यम वर्गीय परिवारों को भी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
  • मैक्किंज़े ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) ने ऐसे समय में अपनी रिपोर्ट जारी की है जब देश बेरोज़गारी दर लगातार बढ़ती जा रही है, और तमाम आर्थिक विश्लेषण बता रहे हैं कि चालू वित्तीय वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर नकारात्मक रह सकती है।

सुझाव:

  • भारत को उत्पादकता बढ़ाने और नए रोज़गार सृजित करने हेतु आगामी 12-18 महीनों में कई महत्त्वपूर्ण सुधार करने होंगे, इस रिपोर्ट में ऐसे कुल 6 क्षेत्रों को भी चिन्हित किया गया है, जिनमें सुधार कर अर्थव्यवस्था में उत्पादकता और प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ाया जा सकता है।
  • मैक्किंज़े ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) ने अपनी रिपोर्ट में मुख्यतः विनिर्माण, रियल एस्टेट, कृषि, स्वास्थ्य और खुदरा क्षेत्रों पर ध्यान देने की वकालत की है।
  • रिपोर्ट में 30 से अधिक राज्य के स्वामित्त्व वाले उद्यमों का निजीकरण करने और पूंजी बाज़ार में अधिक घरेलू बचत को शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है।
  • इसके अलावा रिपोर्ट में लचीले श्रम बाज़ार का निर्माण करने और कुशल बिजली वितरण को सक्षम बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
  • वित्तीय क्षेत्र के दृष्टिकोण से इस रिपोर्ट में ‘बैड बैंक’ के निर्माण की भी बात की गई है।

‘बैड बैंक’ की अवधारणा:

  • बैड बैंक एक आर्थिक अवधारणा है जिसके अंतर्गत आर्थिक संकट के समय घाटे में चल रहे बैंकों द्वारा अपनी देयताओं को एक नए बैंक को स्थानांतरित कर दिया जाता है। ये बैड बैंक कर्ज़ में फंसी बैंकों की राशि को खरीद लेते हैं और उससे निपटने का काम भी इन्ही का ही होता है।
  • जब किसी बैंक की गैरनिष्पादनकारी परिसंपत्तियाँ सीमा से अधिक हो जाती हैं, तब राज्य के आश्वासन पर एक ऐसे बैंक का निर्माण किया जाता है जो मुख्य बैंक की देयताओं को एक निश्चित समय के लिये धारण कर लेता है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पुलिक्कली

(Pulikkali)

  1. पुलिक्कलीकेरल राज्य की एक मनोरंजक लोक कला का एक स्वरूप है।
  2. इसे मुख्य रूप से केरल में मनाये जाने वालेओणम के अवसर पर लोगों का मनोरंजन करने के लिए प्रशिक्षित कलाकारों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  3. पुलिक्कली का शाब्दिक अर्थबाघों का खेल है।
  4. पुलिककली की उत्पत्ति 200 साल से अधिक पुरानी है।
  5. ऐसा माना जाता है कि इस लोक कला को कोचीन के तत्कालीन महाराजा महाराजा राम वर्मा शक्त्न थमपुरन द्वारा शुरू किया गया था।

 

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