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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

अरब लीग

24th September, 2020

G.S. Paper-II (International)

अरब लीग, उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका तथा सऊदी अरब के आसपास अरब देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।

  • इसकी स्थापना 22  मार्च 1945 को काहिरा में छह सदस्य देशों—मिस्रइराक़जॉर्डनलेबनानसऊदी अरब और सीरिया के द्वारा की गयी थी।
  • वर्तमान में, अरब लीग में22 सदस्य हैं, किंतु सीरिया के गृह-युद्ध के दौरान सरकारी दमन के परिणामस्वरूप, सीरिया की सदस्यता नवंबर 2011 से निलंबित कर दी गई है।
  • अरब लीग का मुख्य उद्देश्य‘सदस्य देशों के बीच संबंधों को गहन करना और उनके मध्य सहयोग-समन्वय करना, उनकी स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा करना, और अरब देशों के मामलों और हितों के संबंध में एक सामान्य तरीके से विचार करना है’।

चर्चा का कारण-

हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन द्वारा इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य किये जाने की प्रतिक्रिया में, फिलिस्तीनी प्राधिकारी, औपचारिक रूप से अरब लीग में एक महत्वपूर्ण भूमिका से पीछे हट गए हैं।

विवाद का विषय-

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन द्वारा 15 सितंबर को वाशिंगटन में इजराइल के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को ‘अब्राहम एकॉर्ड’ (Abraham Accord) का नाम दिया गया है, तथा इसे ट्रम्प प्रशासन द्वारा नए मध्य पूर्व की सुबह कहा गया है। फिलिस्तीनियों ने इस समझौते की आलोचना की है, और इसे इजराइल के अवैध कब्जे को समाप्त करने, तथा स्वतंत्र राज्य का दर्जा पाने के प्रयासों के लिए झटके के रूप में देखा है।

सरकारी प्रतिभूतियाँ

G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा का कारण-

इस वित्तीय वर्ष में, 7 अप्रैल से 22 सितंबर तक, 27 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा राज्य सरकार प्रतिभूतियों (State government securities) या राज्य विकास ऋण (SDL) के माध्यम से संचयी रूप से 3.26  लाख करोड़ रुपये की राशि जुटायी गयी है।

  • यह, वर्ष 2019-20 में समान अवधि के दौरान ऋण द्वारा जुटाई गयी राशि से 45% अधिक है।
  • तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थानशीर्ष 5 ऋण लेने वाले राज्य रहे हैं। राज्यों को अब तक दिए गए कुल ऋण का 54% इन पांच राज्यों को दिया गया है।

सरकारी प्रतिभूति (Government Security: G-Sec), केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी किये गए व्यापार किये जा सकने वाले उपकरण(Tradeable Instrument) होती हैं।

प्रमुख विशेषताऐं-

  • यह सरकार के ऋण दायित्वों को स्वीकार करती है।
  • ऐसी प्रतिभूतियां, अल्पकालिक(ट्रेजरी बिल – एक वर्ष से कम अवधि की मूल परिपक्वता सहित) अथवा दीर्घकालिक (सरकारी बांड या दिनांकित प्रतिभूतियां – एक वर्ष या अधिक अवधि की मूल परिपक्वता सहित) दोनों प्रकार की हो सकती हैं।
  • केंद्र सरकार, ट्रेजरी बिल और सरकारी बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियां, दोनों को जारी करती है।
  • राज्य सरकारें केवल बांड अथवा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हेंराज्य विकास ऋण कहा जाता है।
  • चूंकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है, अतः इनके डिफ़ॉल्ट होने का कोई जोखिम नहीं होता है, और इसलिए, उन्हें जोखिममुक्त सुरक्षित उपकरण (Gilt-Edged Instruments) कहा जाता है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI)को समय-समय पर निर्धारित सीमा के भीतर G-Secs बाजार में भागीदारी हेतु अनुमति दी गयी है।

सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) अस्थिर क्यों मानी जाती हैं?

द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रति‍भूति‍यों (G-Secs) की कीमतों में तेजी से उतारचढ़ाव होता है। इनकी कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित होते हैं:

  • प्रतिभूतियों कीमांग और आपूर्ति
  • अर्थव्यवस्था के भीतरब्याज दरों में होने वाले परिवर्तन तथा अन्य वृहत-आर्थिक कारक, जैसे तरलता और मुद्रास्फीति।
  • अन्य बाजारों, जैसे वित्त, विदेशी मुद्रा, ऋण और पूंजी बाजार में होने वाला विकास।
  • अंतर्राष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों, विशेष रूप से यूएस ट्रेजरीज़ में होने वाला विकास।
  • RBI द्वारा किये जाने वाले नीतिगत परिवर्तन, जैसे रेपो दरों में बदलाव, नकदी-आरक्षित अनुपात और खुले बाजार के परिचालन।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक,2020

G.S. Paper-III (Economy)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लोकसभा ने अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने के लिये आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया है।

प्रमुख बिंदु-

लोकसभा द्वारा पारित यह विधेयक 5 जून 2020 को जारी किये गए अध्यादेशों का स्थान लेगा और लोकसभा द्वारा इसे 15 सितंबर,  2020 को पारित किया गया था।

उद्देश्य-

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 का उद्देश्य निजी निवेशकों के व्यावसायिक कार्यों में अत्यधिक विनियामक हस्तक्षेप की आशंकाओं को समाप्त करना है।

आवश्यकता-

यद्यपि भारत में अधिकतर कृषि वस्तुओं के उत्पादनव्यापक पैमाने पर इस प्रकार की बर्बादी को रोका जा सकता है।

लाभ-

  • इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने विनियामक वातावरण को उदार बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाए। संशोधन विधेयक में यह व्यवस्था की गई है कि युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषिउपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • इस संशोधन के माध्यम से न केवल किसानों के लिये बल्कि उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिये भी सकारात्मक माहौल का निर्माण होगा और यह निश्चित रूप से हमारे देश को आत्मनिर्भर बनाएगा।
  • इस संशोधन से कृषि क्षेत्र की समग्र आपूर्ति श्रृंखला तंत्र को मज़बूती मिलेगी। इस संशोधन के माध्यम से इस कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर किसान की आय दोगुनी करने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955-

  • आवश्यक वस्तुओं या उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये तथा उन्हें जमाखोरी और कालाबाज़ारी से बचाने के लिये सरकार ने वर्ष 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम बनाया था।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में आवश्यक वस्तुओं की कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। अधिनियम की धारा 2 (A) में कहा गया है कि ‘आवश्यक वस्तु का अर्थ इसी अधिनियम की अनुसूची (Schedule) में निर्दिष्ट वस्तुओं से है।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को अधिनियम की अनुसूची में आवश्यक वस्तु के रूप में किसी एक विशिष्ट वस्तु को जोड़ने अथवा उसे हटाने का अधिकार देता है।
  • यदि केंद्र सरकार सहमत है कि सार्वजनिक हित में किसी वस्तु को आवश्यक वस्तु घोषित करना आवश्यक है तो वह राज्य सरकारों की सहमति से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सकती है।
  • किसी वस्तु को ‘आवश्यक वस्तु’ घोषित करने से सरकार उस वस्तु के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है, साथ ही सरकार उस वस्तु के संबंध में एक स्टॉक सीमा भी लागू कर सकती है।

अधिनियम की आलोचना-

  • ध्यातव्य है कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को ऐसे समय में बनाया था जब पूरा देश खाद्यान्न उत्पादन के असामान्य स्तर के कारण खाद्य पदार्थों की कमी का सामना कर रहा था। उस समय भारत अधिकांशतः अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये आयात और अन्य देशों से मिलने वाली सहायता पर निर्भर था।
  • ऐसे में खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकने के लिये वर्ष 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम लाया गया, किंतु अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं, अब भारत खाद्यान्न उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुका है, इसलिये इन बदली हुई परिस्थितियों में अधिनियम को बदलना भी आवश्यक है।

प्री के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

पैसेज एक्सरसाइज

(PASSEX)

  • भारतीय नौसेना द्वारा 23 से 24 सितंबर 20 के मध्य पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना (RAN) के साथ एकमार्ग अभ्यास (PASSEX) किया जायेगा।
  • भारतीय नौसेना द्वारा PASSEX का संचालन नियमित रूप से मित्र विदेशी नौसेनाओं के साथ किया जाता है।

 

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