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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

अयोध्या के राम मंदिर की नागर वास्तुकला

7th August, 2020

G.S. Paper-II (National)

संदर्भ

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण मंदिर वास्तुकला की नागर शैली के अनुसार किया जायेगा।

मंदिर वास्तुकला की नागर शैली

  1. मंदिर वास्तुकला की नागर शैलीउत्तर भारत में पाई जाती है।
  2. नागर शैली में मंदिरों का निर्माण मुख्यतः ऊँची वेदी (मंच/ चबूतरा) पर किया जाता है, जिसेजगती (Jagati) कहा जाता है। इन मंदिरों में गर्भगृह के सामने मंडपों का निर्माण किया जाता है।
  3. गर्भगृह तथा मंडपों के उपर शिखर स्थापित किये जाते है, गर्भगृह के उपर का शिखर सबसे ऊँचा होता है।
  4. नागर शैली में आमतौर परविस्तृत चाहरदीवारी अथवा प्रवेश द्वार नहीं होते हैं।
  5. गर्भगृह के चारों ओर एक रिक्त स्थान होता है जोप्रदक्षिणा पथ कहलाता है, जो प्रायः ढका हुआ होता है।

 

हिंदू मंदिर के मूल रूप में निम्नलिखित वास्तु रचनाएँ सम्मिलित होती हैं

  1. गर्भगृह यह मंदिर का वह छोटा कक्ष होता है जिसमे मंदिर के मुख्य देवी / देवता निवास करते हैं।
  2. मंडप मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप एक हालनुमा कक्ष होता है, जिसे प्रायः बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न कार्य करने हेतु बनाया जाता है।
  3. शिखर यह पर्वत की चोटी के समान रचना होती है, जिसे प्रायः गर्भगृह के ऊपर स्थापित किया जाता है, यह आकार में पिरामिड की आकृति से लेकर वक्राकार तक विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं।
  4. वाहन यह मुख्य देवता की वाहन होता है, जिसे सामान्यतः गर्भगृह की सीध में स्थापति किया जाता है।

नागर शैली की उपशैलियाँ

नागर शैली को विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर ओडिशाखजुराहोसोलंकी आदि प्रकार की उपशैलियों में विभाजित किया गया है।

ब्रूशरणार्थी

G.S. Paper-II (National)

चर्चा में क्यों?

मिज़ोरम से विस्थापित ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्त्व करने वाले तीन संगठनो ने संयुक्त आंदोलन समिति (Joint Movement Committee- JMC) द्वारा त्रिपुरा में ब्रू समुदाय के पुनर्वास के लिये प्रस्तावित स्थलों को खारिज कर दिया है। संयुक्त आंदोलन समिति गैर ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्त्व करने वाला एक संगठन है।

प्रमुख बिंदु

  • मिज़ोरम ब्रू विस्थापित जन फोरम (Mizoram Bru Displaced Peoples’ Forum), मिज़ोरम ब्रू विस्थापित जन समन्वय समिति (Mizoram Bru Displaced Peoples’ Coordination Committee) और ब्रू विस्थापित कल्याण समिति (Bru Displaced Welfare Committee) ने ब्रू समुदाय के पुनर्वास के लिये JMC के चार सदस्यों को निगरानी टीम में शामिल करने की माँग को भी खारिज़ कर दिया है।
  • इनका कहना है कि पिछले 23 वर्षों के दौरान मिज़ोरम के पुनरुत्थान या त्रिपुरा में ब्रू समुदाय के पुनर्वास से संबंधित मुद्दे में इन सदस्यों का कोई संबंध या भागीदारी नहीं रही है।
  • ब्रू प्रतिनिधियों का तर्क है कि ब्रू समुदाय के लिये प्रस्तावित स्थलों के चयन मेंकंचनपुर नागरिक सुरक्षा मंच और मिज़ो कन्वेंशन (JMC के प्रमुख घटक) का हस्तक्षेप पूरी तरह से अनुचित है क्योंकि वे तो चतुर्पक्षीय समझौते के हस्ताक्षरकर्त्ता थे और ही उनकी कोई  भागीदारी थी।
  • इसके अलावा उनका कहना है कि JMC द्वारा प्रस्तावित स्थल सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं से असंबद्ध हैं तथा अस्पताल, स्कूल एवं अन्य सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं।

पृष्ठभूमि

  • 16 जनवरी, 2020 को केंद्र सरकार, त्रिपुरा तथा मिज़ोरम की राज्य सरकारों ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू शरणार्थियों से जुड़ा एकचतुर्पक्षीय समझौता हुआ था।
  • इस समझौते के अनुसार, लगभग 34 हज़ार ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा, साथ ही उन्हें सीधे सरकारी तंत्र से जोड़कर राशन, यातायात, शिक्षा आदि की सुविधा प्रदान कर उनके पुनर्वास में सहायता प्रदान की जाएगी।
  • JMC मेंबंगाली, मिज़ो, बौद्ध बरुआ और अन्य समुदायों के लोग शामिल थे।
  • इसने वर्ष 1997 के दौरान हुए मिज़ोरम में जातीय हिंसा से बचने वालेब्रू समुदाय के पुनर्वास के लिये 21 जुलाई को त्रिपुरा सरकार को एक ज्ञापन सौंपा था।
  • इसमें उत्तरी त्रिपुरा ज़िले केकंचनपुर और पनीसागर उपखंडों में छह स्थानों को निर्दिष्ट किया गया था।
  • JMC ने इन स्थानों पर लगभग 500 परिवारों को बसाने का प्रस्ताव भी रखा था।

ब्रू समुदाय

  • ब्रू समुदाय भारत केपूर्वोत्तर क्षेत्र का एक जनजातीय समूह है। ऐतिहासिक रूप से यह एक बंजारा समुदाय है तथा इस समुदाय के लोग झूम कृषि (Slash and Burn Farming) से जुड़े रहे हैं।
  • ब्रू समुदाय स्वयं को म्याँमार के शान प्रांत का मूल निवासी मानता है, इस समुदाय के लोग सदियों पहले म्याँमार से आकर भारत के मिज़ोरम राज्य में बस गए थे।
  • ब्रू समुदाय के लोग पूर्वोत्तर के कई राज्यों में रहते हैं परंतु इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी मिज़ोरम केमामित और कोलासिब ज़िलों में पाई जाती है।
  • इस समुदाय के अंतर्गत लगभग 12 उप-जातियाँ शामिल हैं।
  • ब्रू समुदाय के कुछ लोग बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में भी निवास करते हैं।
  • मिज़ोरम में ब्रू समुदाय को अनुसूचित जनजाति के तहत सूचीबद्ध किया गया है, वहीं त्रिपुरा में ब्रू एक अलग जाति समूह है।
  • त्रिपुरा में ब्रू समुदाय कोरियांग नाम से जाना जाता है।
  • इस समुदाय के लोगब्रू भाषा बोलते हैं, वर्तमान में इस भाषा की कोई लिपि नहीं है।
  • पलायन के परिणामस्वरूप समुदाय के कुछ लोग ब्रू भाषा के अतिरिक्त कुछ अन्य राज्यों की भाषाएँ जैसे-बंगाली, असमिया, मिज़ो, हिंदी और अंग्रेज़ी भी बोल लेते हैं।

भूजल के व्यावसायिक उपयोग हेतु राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा कड़ी शर्तें

G.S. Paper-III (Environment & Ecology)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green Tribunal-NGT)  द्वारा भूजल के व्यावसायिक उपयोग करने के लिए कड़ी शर्ते लागू की गयी हैं।

  1. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने यह निर्देश, देश में भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को हेतु दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किये।
  2. इसके साथ ही, NGT नेकेंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority– CGWA) द्वारा वर्ष 2020 के दिशानिर्देशों को क़ानून के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया। इसके पूर्व, पिछले वर्ष NGT ने CGWA के वर्ष 2018 में जारी किये गए दिशानिर्देशों को भी रद्द कर दिया था।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा निर्धारित शर्तें

  1. व्यवसायिक गतिविधियों हेतुभूजल निकासी के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किये जायेंगे। नयी प्रक्रिया में सभी शर्तों का अनुपालन करना सुनिश्चित किया जायेगा।
  2. प्राधिकरण नेपर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (Environment Impact Assessment– EIA) के बिना व्यवसायिक इकाइयों के लिए भूजल निकासी हेतु सामान्य अनुमति दिए जाने पर विशेष रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।
  3. नए परमिट, पानी की निर्दिष्ट मात्रा के लिए जारी किये जायें तथा इसकी डिजिटल प्रवाह मीटर के माध्यम से निगरानी की जाए। इसके अतिरिक्त, प्रतिवर्ष तीसरे पक्ष द्वारा ऑडिट किया जाना चाहिए।
  4. ऑडिट में फेल होने पर इकाइयों पर सख्त कार्यवाही की जाये तथा उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  5. सभी, अतिशोषित (Overexploited), संकटपूर्ण तथा अर्द्ध– संकटपूर्ण इकाइयोंके लिए जल-मानचित्रण करना अनिवार्य होगा।
  6. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण सभी अतिशोषित, संकटपूर्ण तथा अर्द्ध- संकटपूर्ण क्षेत्रों के लिए जल प्रबंधन योजना बनाने के लिएतीन महीने की समयावधि प्रदान की है।

निर्देशों से संबंधित चिंताएं

  1. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, इन कड़ी शर्तो से COVID-19 के कारण नुकसान में चल रहे व्यवसायों के लिए कठिनाई में डाल दिया है।
  2. इन प्रतिबंधो से भूजल का उपयोग मुश्किल हो गया है।
  3. NGT के इन निर्देशों से, जल शक्ति मंत्रालय के विधायी कार्यों में भी हस्तक्षेप होगा।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की इन शर्तों की आवश्यकता

  1. केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारापिछले 23 वर्षों से किये जा रहे विनियमन के बाद भी भूजल स्तर के कोई सुधार नहीं हुआ है, और न ही CGWA द्वारा भविष्य के लिए कोई योजना पेश की गयी है।
  2. जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों के मध्य 120 वें स्थान पर था।
  3. भारत के 54% भूजल कुओं के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गयी है, वर्ष 2020 तक देश के 21 प्रमुख शहरों में भूजल की कमी हो जायेगी।
  4. भारत में भूजल का सर्वाधिक दोहन किया जाता है।वैश्विक स्तर पर भूजल उपयोग की कुल मात्रा का 25% भारत द्वारा उपयोग किया जाता है तथा इसके उपयोग में लगातार वृद्धि हो रही है।

Facts for Pelims:

MyGov क्या है?

चर्चा का कारण

हाल ही में, गोवा MyGov नागरिक भागीदारी मंच में शामिल हुआ है। इससे पहले 12 अन्य राज्य MyGov प्लेटफार्म लॉन्च कर चुके हैं।

  • MyGov (mygov.in), भारत सरकार का नागरिक सहभागिता और लोगों के विचार जानने (क्राउडसोर्सिंग) का प्लेटफ़ॉर्म है।
  • इसे वर्ष 2014 में लॉन्च किया गया था।
  • इसका उद्देश्य शासन और नीति निर्धारण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • 26 जुलाई 2014 को अपने लॉन्च के बाद से, माईगॉव ने इंटरनेट, मोबाइल ऐप, एसएमएस आदि प्रणालियों का उपयोग करते हुए चर्चा, कार्य, नवाचार चुनौतियों, जनमत संग्रह, सर्वेक्षण, ब्लॉग, वार्ता, क्विज़ आदि विभिन्न तरीकों को अपनाया है।

 

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