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डेली करेंट अफेयर्स 2020

विषय: प्रीलिम्स और मेन्स के लिए

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग

समाचार में क्यों?

हाल ही में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill- CAB) संसद में पारित हुआ। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (United States Commission on International Religious Freedom-USCIRF) ने इस विधेयक के पारित होने पर चिंता व्यक्त की।

  • USCIRF के बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर USCIRF द्वारा दिया गया बयान न तो सही है और न ही आवश्यक है।

USCIRF के बारे में:

  • USCIRF एक सलाहकार और परामर्शदात्री निकाय है, जो अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दों पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस और प्रशासन को सलाह देता है।
  • USCIRF स्वयं को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (International Religious Freedom Act-IRFA) द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र, द्विदलीय अमेरिकी संघीय आयोग के रूप में वर्णित करता है।
  • हालाँकि USCIRF के कार्यान्वयन में वैचारिक प्रभाव बहुत कम है, लेकिन यह अमेरिकी सरकार की दो शाखाओं विधायिका और कार्यपालिका के लिये विवेक-रक्षक (Conscience-Keeper) के रूप में कार्य करता है।

IRFA क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1998, 105वीं अमेरिकी कॉन्ग्रेस (1997-99) द्वारा पारित किया गया था और 27 अक्तूबर, 1998 को तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा हस्ताक्षरित किये जाने के साथ ही कानून के रूप में लागू हुआ। यह विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के संदर्भ में अमेरिका द्वारा व्यक्त चिंताओं का विवरण है।

उद्देश्य:

  • “संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति को सम्मान के साथ व्यक्त करने और संयुक्त राज्य अमेरिकी पक्ष का मज़बूती से समर्थन करने के लिये।
  • विदेशों में धर्म के आधार पर सताए गए व्यक्तियों के लिये।
  • विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के जवाब में संयुक्त राज्य की कार्रवाई को अधिकृत करने के लिये।
  • डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिये राजदूत नियुक्त करने के लिये।

USCIRF के कार्य :

  • USCIRF वैश्विक स्तर पर (संयुक्त राज्य अमेरिका को छोड़कर) धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की निगरानी के लिये अंतर्राष्ट्रीय मानकों का उपयोग करने के लिये आज्ञापित (Mandated) है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कॉन्ग्रेस को नीतियाँ बनाने की सिफारिश करता है।
  • USCIRF के आयुक्तों को दोनों राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • चूँकि USCIRF डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट से अलग है, इसलिये अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिये विभाग का एम्बेसडर एट लार्ज (Ambassador-at-Large) एक पदेन आयुक्त होता है जिसे मत देने का अधिकार नहीं होता।
  • एक पेशेवर, गैर-पक्षपातपूर्ण कर्मचारी USCIRF के काम का समर्थन करता है।

USCIRF की मुख्य ज़िम्मेदारियाँ:

  • प्रत्येक वर्ष 1 मई तक की एक वार्षिक रिपोर्ट जारी करना, जिसमें अमेरिकी सरकार द्वारा IRFA के कार्यान्वयन का आकलन किया जाता है।
  • विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का प्रमाण प्रस्तुत करना।
  • कॉन्ग्रेस के कार्यालयों के साथ काम करके, धार्मिक मुद्दों से जुड़ी सुनवाई के दौरान गवाही और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों की ब्रीफिंग में कॉन्ग्रेस को शामिल कर अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना।
  • संयुक्त राष्ट्र, यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (Organization for Security and Cooperation in Europe- OSCE), यूरोपीय संघ और दुनिया भर के सांसदों के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता से संबंधित बैठकों में बहुपक्षीय रूप से संलग्न होना।

USCIRF के अनुसार “धार्मिक स्वतंत्रता” :

  • “धार्मिक स्वतंत्रता एक महत्त्वपूर्ण मानव अधिकार है जिसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और संधियों द्वारा मान्यता प्राप्त है। धर्म या आस्था की स्वतंत्रता एक व्यापक अधिकार है जिसमें विचार, विवेक की स्वतंत्रता के साथ-साथ अभिव्यक्ति, संघ और समागम की स्वतंत्रता अंतर्निहित है। इस स्वतंत्रता को बढ़ावा देना अमेरिकी विदेश नीति का एक आवश्यक घटक है”।

पूर्व में USCIRF द्वारा उठाए गए भारत से संबंधित मुद्दे :

  • अगस्त 2019 में USCIRF ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ भी एक बयान जारी कर कहा था कि NRC का मुद्दा पूर्वोत्तर भारत में एक विशिष्ट समुदाय के लिये संभवतः नकारात्मक और भय का माहौल बना रहा है।
  • जून 2019 में भारतीय राज्य झारखंड में एक व्यक्ति की मॉब लिंचिंग की भी USCIRF ने आलोचना की थी।
  • जुलाई 2008 में जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को न्यू जर्सी में एक सम्मेलन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया गया था तब इसने गुजरात के मुख्यमंत्री को पर्यटक वीज़ा न देने (गुजरात दंगों के कारण) का आग्रह किया था।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

DSC Prize 2019 :

  • हाल ही में लेखक अमिताभ बागची को उनके उपन्यास ‘हाफ द नाइट इज गॉन के लिये दक्षिण एशियाई साहित्य के लिये डीएससी पुरस्कार- 2019 (DSC Prize for South Asian Literature- 2019) से सम्मानित किया गया है।

पुरस्कार के विषय में:

  • यह दक्षिण एशिया की संस्कृति, राजनीति, इतिहास या लोगों के बारे में किसी भी जाति या राष्ट्रीयता पर लेखन के लिये लेखकों को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • यह दक्षिण एशिया को अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, म्याँमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के रूप में परिभाषित करता है।

स्थापना:

दक्षिण एशियाई साहित्य के लिये DSC पुरस्कार की स्थापना 2010 में इसके संस्थापकों, सुरिना नरूला और मनहाद नरूला द्वारा की गई थी।

पुरस्कार राशि:

इस पुरस्कार के तहत 25000 डॉलर की राशि प्रदान की जाती है।

 

 

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